कैसे महँगाई आपकी बचत को चुपचाप खा रही हैं?

सोचिए, 10 साल पहले 1 लाख की क्या क़ीमत थी और आज इतना ही पैसा सिर्फ़ 59,500 क्यों रह गया हैं। दरअसल, CPI (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में आपके पैसे की वैल्यू 40 फ़ीसदी से ज़्यादा गिरी है।

रुपये की इस परचेजिंग पावर यानि क्रय शक्ति के कमज़ोर होने के लिए आप महंगाई को ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं।  मगर ये महंगाई आख़िर है क्या आइए समझें। 

महंगाई क्या है? (What is inflation?)

महंगाई (मुद्रास्फ़ीति) का मतलब समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की क़ीमतों का लगातार बढ़ना है, जिससे आपके पैसे की परचेजिंग पावर कम हो जाती है।

मिसाल के तौर पर, अगर महंगाई दर 6 फ़ीसदी है, तो आज 100 रुपये की क़ीमत वाली वस्तु अगले साल 106 रुपये की होगी। हालांकि ये अंतर छोटा लगता है, लेकिन महंगाई समय के साथ बढ़ती है और आपकी वेल्थ पर ख़ासा असर कर सकती है।

कुल मिलाकर, महंगाई रिवर्स कंपाउंडिंग के रूप में काम करती है। जिस तरह निवेश करने पर कंपाउंडिंग से वेल्थ बढ़ने में मदद मिलती है, उसी तरह जब आप निवेश नहीं करते हैं तो महंगाई चुपचाप आपके पैसे की वैल्यू को कम कर देती है।

देश की महंगाई दर से क्यों ज़्यादा हो सकती है व्यक्तिगत महंगाई?

हाल के सरकारी आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर की महंगाई दर 5.22 फ़ीसदी रही थी।

हालांकि, ये आंकड़ा अलग-अलग प्रोडक्ट और सर्विसेज़ की क़ीमत में बदलाव पर आधारित राष्ट्रीय औसत है।

इसके अलावा, आपकी व्यक्तिगत महंगाई नीचे बताए गए तीन फ़ैक्टरों के आधार पर ज़्यादा (या कम) हो सकती है:

ख़र्च की आदतें: अगर आपके ख़र्च का बड़ा हिस्सा हेल्थकेयर, एजुकेशन या लग्ज़री गुड्स के सामान जैसी कैटेगरी पर ख़र्च होता है, तो राष्ट्रीय औसत की तुलना में आपकी महंगाई दर बहुत ज़्यादा हो सकती है।

स्थान: ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में महंगी सेवाओं और लाइफ़स्टाइल के विकल्पों के कारण शहरी क्षेत्रों में अक्सर ज़्यादा महंगाई का सामना करना पड़ता है।

लाइफ़स्टाइल के विकल्प: प्रीमियम प्रोडक्ट्स और सर्विस पर ज़्यादा ख़र्च करने वाले व्यक्ति को ज़रूरी वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने वाले व्यक्ति की तुलना में ज़्यादा महंगाई का सामना करना पड़ेगा।

महंगाई कैसे आपके निवेश पर असर करती है?

महंगाई सिर्फ़ आपके रोज़मर्रा के ख़र्चों पर ही नहीं असर डालती। ये आपकी बचत और निवेश को भी प्रभावित करती है।

अगर आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न महंगाई दर से कम है, तो समय के साथ आपकी वास्तविक पूंजी कम होती जाती है। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 5 फ़ीसदी ब्याज़ पाने वाली फ़िक्स्ड डिपॉज़िट (FD) है और महंगाई 6 फ़ीसदी है, तो आप क़ागज़ पर अपने पैसे को बढ़ते हुए देखने के बावजूद वास्तव में परचेज़िंग पावर गंवा रहे हैं।

इस तरह, वेल्थ की रक्षा और लंबे समय की फ़ाइनेंशियल सफलता के लिए महंगाई को मात देना ज़रूरी है।

महंगाई को कैसे मात दें: इक्विटी में निवेश करें

महंगाई से आगे रहने का सबसे असरदार तरीक़ा है, लंबे समय तक इक्विटी में निवेश करना। ऐसा क्यों है: ऐतिहासिक रूप से, भारतीय इक्विटी ने सालाना 12-14 फ़ीसदी का रिटर्न दिया है, जो लगभग 6 फ़ीसदी की औसत महंगाई दर से काफ़ी ज़्यादा है।

दूसरे शब्दों में, अगर आपके निवेश पर 12 फ़ीसदी रिटर्न मिलता है और महंगाई औसतन 6 फ़ीसदी है, तो आपका वास्तविक रिटर्न (वेल्थ की ग्रोथ) 6 फ़ीसदी है।

बढ़ा सबक़

महंगाई चुपचाप आपकी वेल्थ को निगलती जाती है, लेकिन आप इक्विटी की मदद से इसका मुक़ाबला कर सकते हैं।

भले ही, इक्विटी में कम समय में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से इक्विटी में मिलने वाला रिटर्न महंगाई से आगे रहा है और ये लंबे समय में वेल्थ तैयार करने के लिए सबसे प्रभावी विकल्प बना हुआ है।

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