क्यों दें खुद की रिटायरमेंट प्लानिंग को प्राथमिकता?
हमारे देश में, बहुत से माता-पिता एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्राथमिकता को अनदेखा करते हैं: वह हैं उनकी अपनी रिटायरमेंट। जबकि अपने बच्चों की शिक्षा और विवाह के लिए भावनात्मक रूप से निवेश करना स्वाभाविक है, लेकिन खुद के लिये रिटायरमेंट योजना की उपेक्षा करना बुढ़ापे में आपकी वित्तीय स्वतंत्रता और सम्मान को ठेश पहुँचा सकता हैं।
भारतीय माता-पिता की इमोशनल जर्नी
भारत में माता-पिता अक्सर यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं कि उनके बच्चों को जीवन में सर्वोत्तम अवसर मिलें। उच्च शिक्षा की फंडिंग से लेकर शादी के खर्चों को वहन करने तक, माता-पिता इन जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए हर सम्भव प्रयास करते हैं। हालाँकि यह उदारता सराहनीय है, लेकिन इससे अक्सर उनकी खुद की फाइनेंशल हालत बुढ़ापे में कमजोर पड़ जाती है।
आइये एक उदाहरण से समझते हैं
एक दंपत्ति जो प्रति माह ₹50,000 कमाता है, वह मासिक खर्चों पर ₹35,000 खर्च करता है। वे अपने बच्चे की शिक्षा के लिए SIP में प्रति माह ₹10,000 और अपने बच्चे की शादी के लिए SIP में प्रति माह ₹5,000 निवेश कर रहे हैं। हालाँकि, खुद की रिटायरमेंट के लिए उनका SIP में निवेश बिल्कुल ज़ीरो है।
यह परिदृश्य असामान्य नहीं है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर करता है। जबकि दंपत्ति अपने बच्चे के भविष्य की योजना बना रहे हैं, और वे खुद की वित्तीय सुरक्षा की उपेक्षा कर रहे हैं। बच्चे, शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन का लाभ उठा सकते हैं, लेकिन रिटायरमेंट के लिए कोई लोन उपलब्ध नहीं है।
भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग क्यों ज़रूरी है?
रिटायरमेंट प्लानिंग को प्राथमिकता न देने से ये हो सकता है:
अपनो पर निर्भरता: पर्याप्त रिटायरमेंट बचत के बिना, माता-पिता को अपने बच्चों या रिश्तेदारों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
सीमित जीवनशैली विकल्प: अपर्याप्त फंड रिटायरमेंट के बाद आराम से रहने की क्षमता को सीमित कर सकता हैं।
भावनात्मक तनाव: बुढ़ापे में वित्तीय असुरक्षा माता-पिता और बच्चों दोनों के लिए अनावश्यक तनाव और झगड़ो का कारण बन सकती है।
रिटायरमेंट के लिए SIP: भारतीय माता-पिता के लिए ज़रूरी
अपने रिटायरमेंट को प्राथमिकता देने का मतलब दूसरे लक्ष्यों को नज़रअंदाज़ करना नहीं है। संतुलन बनाने के लिए यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं:
जल्दी शुरू करें: आप जितनी जल्दी रिटायरमेंट के लिए बचत करना शुरू करेंगे, आपके पैसे को चक्रवृद्धि ब्याज के ज़रिए बढ़ने में उतना ही ज़्यादा समय मिलेगा।
समझदारी से निवेश करें: दूसरे लक्ष्यों के लिए पैसे निवेश करने से पहले अपनी आय का एक निश्चित प्रतिशत रिटायरमेंट बचत के लिए अलग रखें।
म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर से सलाह लें: कोई पेशेवर व्यक्ति आपको एक उपयुक्त निवेश योजना बनाने में मदद कर सकता है। जो रिटायरमेंट सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आपके सभी लक्ष्यों को पूरा करे।
अपने बच्चों को शिक्षित करें: उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता के महत्व और शिक्षा ऋण जैसे विकल्पों की उपलब्धता के बारे में जागरूक करें।
आज ही शुरू करें
आपकी रिटायरमेंट आपकी गरिमा, मान-सम्मान और स्वतंत्रता के बारे में है। इसे भाग्य के भरोसे न छोड़ें। आज ही अपनी रिटायरमेंट की योजना बनाना शुरू करें। किसी विशेषज्ञ से बात करें, अपने खर्चों की समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि आपके सुनहरे वर्ष यानी बुढ़ापा वाकई में सुनेहरा हों।
अगर आप निवेश के लिए कोई हेल्प चाहते हैं, तो निःशंकोच मुझसे संपर्क सकते हैं।
Comments
Post a Comment