क्यों करे कम्पनी फिक्स्ड डिपॉजिट (Corporate FDs) में इन्वेस्ट?
आज हम बात करेंगे कम्पनी फिक्स्ड डिपॉजिट के बारे में। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भारत के पसंदीदा निवेश विकल्पों में से एक है। और ज़्यादातर लोग FD में इन्वेस्ट करने के लिए बैंक से संपर्क करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियाँ (NBFC) भी फिक्स्ड डिपॉजिट में इन्वेस्ट करने की सुविधा देती हैं? इन्हें कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट कहा जाता है, और ये भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शासित होते हैं। आम फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह, कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट भी तय अवधि के लिए एक तय दर पर रिटर्न देते हैं। लेकिन बैंक FD की तुलना में इसके कई फ़ायदे हैं।
▪️इसकी ब्याज दरें बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से ज़्यादा हैं।
▪️ब्याज क्रेडिट अवधि चुनने की सुविधा - मासिक, त्रैमासिक, अर्ध-वार्षिक या वार्षिक
▪️FD की अवधि 1 साल से लेकर 7 साल तक हो सकती है
▪️कंपनी FD को रेटिंग एजेंसियों द्वारा रेटिंग दी जाती है जो जोखिम कारक (रिस्क फेक्टर) के आकलन में मदद करती हैं
हालाँकि, किसी को क्रेडिट रेटिंग, कंपनी की पृष्ठभूमि और उसके पुनर्भुगतान इतिहास (रिपेमेंट हिस्ट्री) को देखकर गहन शोध करने के बाद ही दी जाती हैं।
कौन निवेश कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति, HUF या कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में निवेश कर सकता है।
किस प्रकार के निवेशको के लिए यह उपयुक्त है?
यह फंड वाले निवेशकों के लिए उपयुक्तता है–
जो बैंक एफडी से बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं और
पूंजी की सुरक्षा चाहते भी चाहते हैं।
कर-देयता क्या होगी?
कंपनी एफडी से ब्याज आय को ‘other Incom’ हेड के तहत निवेशक की कुल आय में जोड़ा जाता है, और तदनुसार निवेशक के कर स्लैब के अनुसार कर लगाया जाता है।
यदि वित्तीय वर्ष के दौरान अनुमानित वार्षिक ब्याज 5000/- रुपये से अधिक होने की संभावना है, तो ब्याज, भुगतान स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के अधीन होगा। हालांकि, कर की ऐसी कटौती से बचने के लिए, निवेशक फॉर्म 15G/H में स्व-घोषणा प्रस्तुत कर सकते हैं या प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए संभावित आयकर प्राधिकरण से छूट प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।
कुछ अच्छी सेटिंग वाली कंपनियां जिनके फिक्स्ड डिपॉजिट में आप इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं।
-बजाज फाइनेंस
-श्रीराम फाइनेंस
-ICICI होम फाइनेंस
-महिंद्रा फाइनेंस
-एचडीएफसी लिमिटेड
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