बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए डिपॉजिट करें या इन्वेस्ट करें??
लेकिन अब हमारे बच्चों के मामले में इन दोनों में से कोई भी तरीका काम आने वाला नहीं है। क्योंकि महंगाई ने हमारी कमर तोड़ दी है। और जो थोड़ी बहुत बची हुई है। वह भी अगले 10 -15 साल में टूट जाएगी। हमारे पास अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पैसा इकट्ठा करने के केवल दो ही तरीके बचते हैं। एक है बचत को जमा करने का और दूसरा है। बचत को निवेश करने का। इन दोनों में मूल अंतर क्या है।
जब हम अपनी बचत को किसी डिपॉजिट स्कीम्स (बैंक, पोस्ट ऑफिस या एलआईसी) में जमा करते हैं। जहां पर हमें 5 से 7% के लगभग रिटर्न मिलता है। लेकिन उतनी ही दर से महंगाई हर साल बढ़ती जा रही है।
इसका मतलब यह है। कि हमारा डिपॉजिट स्कीम में जमा किया गया पैसा साल में जितना बढ़ता है। उतनी ही महंगाई के कारण रुपए की क्रय शक्ति कम हो जाती है। यानी किसी भी डिपाजिट स्कीम में आज जमा किया गया 100 रुपया 6% ब्याज प्रति वर्ष की दर पर दस साल के बाद 179 रुपए हो जाएगा। लेकिन जिस वस्तु की कीमत आज 100 रुपए है। उसकी कीमत भी दस साल के बाद 100 रुपए से बढ़कर 179 रुपए हो जाएगी। (यदि महंगाई 6% रहती हैं तो) डिपाजिट या इन्सुरेंस स्कीम्स में जमा की गई बचत मे जितनी वृद्धि होती है। इतनी ही महंगाई के कारण हमारे खर्चों में वृद्धि हो जाती है।
जिस शादी का खर्च आज 8 लाख रुपए है। आज से 15 साल के बाद उसी 8 लाख वाली शादी का खर्च 22 लाख रुपए हो जाएगा।
15 साल में 22 लाख जुटाने के लिए अगर हम कोई डिपॉजिट या इन्सुरेंस स्कीम का चुनाव करते हैं। जिसकी ब्याज दर 6% हो तो हमें हर महीने 7000 रुपए बचाने होंगे।
दूसरा विकल्प है, निवेश यानी इक्विटी इन्वेस्टमेंट का। जो कि महंगाई को मात देने का एक जबरदस्त विकल्प है। अब तक का इतिहास है, कि म्युचुअल फंड में लंबी अवधि की इक्विटी स्कीम्स में निवेश किया गया पैसा औसत 15% की दर से बढ़ा है। जो कि महंगाई की दर से दोगुना से भी ज्यादा है। जिसके कारण हमारे रुपयों की क्रय शक्ति बढ़ती है।
अगर हम 15 साल में 22 लाख रुपए जुटाने के लिए किसी म्यूच्यूअल फंड (इक्विटी स्कीम) का चुनाव करते हैं, तो हमें हर महीने 3250 रुपए की बचत करनी होगी। परंतु वहीं दूसरी ओर डिपॉजिट स्कीम्स के द्वारा इस टारगेट को पूरा करने के लिए 7000 रुपए की बचत करनी पड़ेगी।
यही नहीं 100 रुपए जैसी छोटी सी बचत से भी हम सही समय पर सही जगह पर निवेश करके एक बड़ी रक़म इकट्ठा कर सकते है। अपनी बचत को किसी भी सेविंग, डिपाजिट या इन्सुरेंस स्कीम्स में जमा करके उसे आराम न करने दें बल्कि किसी इक्विटी म्युचुअल फंड स्कीम में निवेश करके उसे काम पर लगाएं।
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