भविष्य के लिए बचाए गए पैसों की वैल्यू को क्यों औऱ कैसे बढ़ाएं या कैसे बरकरार रखें????

हां यह बात सही है। कि हम लोग बच्चों के जन्म से ही बचत करना शुरू कर देते हैं। और जीवन-भर उस बचत को लाइफ इंश्योरेंस या बैंक की आरडी, एफडी में जमा करते रहते हैं। एक जमाना था। जब ये स्कीमे बहुत लोकप्रिय हुआ करती थी। कारण सिर्फ एक ही था। ब्याज दरें बहुत ऊंची हुआ करती थी। और महंगाई बिल्कुल कम थी। लेकिन आज घटती ब्याज दरें और बढ़ती महंगाई ने इनकी लोकप्रियता को समाप्त कर दिया है।

आज हम सबकी कमाई थोड़ी और खर्चे ज्यादा है। और ऊपर से महंगाई। इन सब के साथ थोड़ा बहुत पैसा जो हम बचाते हैं। उसको भी हम सीधे जाकर बैंक में जमा कर देते हैं। या लाइफ इंश्योरेंस की किसी स्कीम में जमा कर देते हैं। जोकि 100% पक्का है। कि हमें भविष्य में पैसों की तंगी का सामना करना ही पड़ेगा। हम अपनी बचत को और ज्यादा बढ़ा नहीं सकते। अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत को जमा करना, यह महंगाई के दौर में सर्वश्रेष्ठ तरीका नहीं है। बैंक और लाइफ इंश्योरेंस की जितनी भी डिपॉजिट स्कीम्स है। वह केवल एक गुल्लक है। जो पैसा आप इन में जमा करते हो वह केवल इकट्ठा तो होता है, लेकिन बढ़ नहीं पाता है। पैसे को इकट्ठा करना और पैसे को बढ़ाना इन दोनों बातों में बहुत अंतर है।

आज हमने सो रुपए किसी बैंक की स्कीम में जमा कर दिये और उस स्कीम की ब्याज दर 5% है। तो एक साल के बाद हमें 105 रुपए मिलेंगे और इस एक साल में अगर महंगाई की दर भी 5% ही रहती है। तो सो रुपए वाली वस्तु की कीमत भी एक साल के बाद 105 रुपये हो जाएगी। यदि हम अपने 105 रूपये में से 5% बढ़ी हुई महंगाई को  घटा देते हैं तो हमारे हाथ में केवल 100 रुपए बचेंगे। अगर हमारे 100 रुपए में 15% की वृद्धि हो जाए और उसमें से हम 5% महंगाई को घटा दें तो हमारे हाथों में 110 रुपए होंगे, जोकी 100 रुपए की अपेक्षा ज्यादा होंगे, इसे ही पैसों में वृद्धि कहते हैं। जैसे-जसे देश में खुशहाली आएगी, तरक्की- विकास होगा महंगाई भी बढ़ेगी और ब्याज दरें भी और नीचे जाएंगी। जिनके कारण पैसे की वैल्यू और ज्यादा कम होती चली जाएगी।

पैसे की वैल्यू कैसे कम होती है। हम इसको एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके पास 100 रुपए हैं। तो आज बाजार में उसकी वैल्यू क्या है। अगर आज बाजार में चीनी का रेट 40 रुपए प्रति किलो है। तो अढाई किलो चीनी की मात्रा (quantity) 100 रुपए की वैल्यू है। किसी दाल का रेट 100 रुपए प्रति किलो है। तो एक किलो दाल की मात्रा (quantity) सो रुपए की वैल्यू है। तो सौ रुपए में आज हम किसी सामान की जितनी क्वांटिटी, अपने घर पर लेकर आ सकते हैं, वह क्वांटिटी ही आज उसकी वैल्यू है। मान लीजिए अगले 5 साल तक महंगाई की औसत दर 5% रहेगी। तो अगले पांच साल के बाद आज के 100 रुपए के नोट की वैल्यू क्या होगी? 40 रुपए वाली चीनी का रेट 51 रुपए हो जाएगा ,100 वाली दाल का रेट 128 रुपए हो जाएगा। और हम 100 रुपए के बदले अब अढाई किलो चीनी की मात्रा के बजाय 2 किलो चीनी की मात्रा ही खरीद पाएंगे और 1 किलो दाल के बजाय 750 ग्राम दाल खरीद पाएंगे। पांच साल के बाद भी नोट तो वही 100 रुपए का ही रहेगा, लेकिन उससे हम किसी सामान की जितनी क्वांटिटी आज खरीद सकते हैं, आज से पांच साल के बाद उतनी क्वांटिटी नहीं खरीद पाएंगे। भविष्य में सौ रुपए के बदले जितनी भी किसी सामान की क्वांटिटी हमारे हाथों में आएगी वह आज की अपेक्षा कम ही होगी। इसी तरह महंगाई के कारण पैसे की वैल्यू धीरे-धरे कम होती चली जाती है।

 हमारे द्वारा बचाये गये पैसे की वैल्यू घटने की बजाय अगर बढ़ जाए तो कितना अच्छा होगा। क्या पैसे की वैल्यू को बढ़ाया जा सकता है? एक जमाने में पैसे को जमा करने पर उसकी वैल्यू बढ़ जाती थी। क्योंकि ब्याज दरें बहुत ऊंची थी। आज ब्याज दरें बहुत नीचे आ गई है। इसलिए किसी भी बैंक या लाइफ इंश्योरेंस की डिपॉजिट स्कीम में पैसे की वैल्यू को बढ़ाना तो दूर, उसकी वैल्यू को बरकरार रखना भी बड़ा मुश्किल होता जा रहा है। आज जो हमने पैसा बचाया है। भविष्य में उसकी वैल्यू  बरकरार रहे या बढ़ जाए तो हमें इसके लिए इन्वेस्टमेंट को समझना होगा। इन्वेस्टमेंट का मतलब ही होता है। पैसे की वैल्यू को बरकरार रखना या बढ़ाना। सबसे पहले हमने तय करना है। कि हमने अपने पैसे की वैल्यू को बरकरार रखना है या बढ़ाना है। अगर हम अपने पैसे की वैल्यू को बढ़ाना चाहते हैं। तो हमें इक्विटी को समझना होगा। क्योंकि इक्विटी ही एकमात्र ऐसा साधन है। जिसके जरिए हम अपने पैसे की वैल्यू को बढ़ा सकते हैं। केवल इक्विटी के अंदर ही यह क्षमता मौजूद है। जब हम इक्विटी में इन्वेस्ट करते हैं, तो सीधे तौर पर हम राष्ट्र की इकनॉमी में इन्वेस्ट करते हैं। राष्ट्र की तरक्की ओर विकास में इन्वेस्ट करते हैं। 1979 में जो सेंसेक्स 100 पॉइंट से शुरू हुआ था। आज (17-09-21) को 59000 पॉइंट पर है। भले ही इस सफर में उसने बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे हैं।

इक्विटी ही महंगाई को मात देने का जबरदस्त साधन है। पैसों को जमा करने की बजाय एसआईपी के जरिए थोड़ा-थोड़ा इक्विटी में निवेश करें तो लंबे समय में हमें 15% का रिटर्न बड़े आराम से मिल जाता है। अगर हम औसत 5% महंगाई को घटा दे, तो हर वर्ष 10% की बढ़ोतरी हमारे पैसे में होगी। इसका मतलब यह है। कि हमारे पैसे की वैल्यू प्रति वर्ष 10% बढ़ती जा रही है। और यही वजह है, कि भविष्य में हमारे हाथ मे ज्यादा पैसा आएगा। जिससे हमारी ख़रीद करने की क्षमता बढेग़ी। हम अपनी जीवन शैली पर आज की अपेक्षा ज्यादा पैसा खर्च कर पाएंगे और बेहतर जीवन जी पाएंगे।

अब बात करते हैं, की अगर हमें इक्विटी में निवेश करना हो तो कैसे करे। इसका जवाब है, एसआईपी। यानी सिटेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। जिसके जरिये हम अपनी थोड़ी-थोड़ी मासिक बचत को इक्विटी में इन्वेस्ट कर सकते हैं।
इक्विटी में रिस्क भी होता हैं। और इसी रिस्क की वजह से इक्विटी में निवेश के परम्परागत साधनों की अपेक्षा ज्यादा रिटर्न बन पाता हैं। एसआईपी के जरिए इक्विटी में निवेश करना रिस्क को धीरे-धीरे लेने के समान है। अगर हम एसआईपी के जरिए नियमित और संतुलित तरीके से इक्विटी में निवेश करते हैं। तो हमारा निवेश कुछ मंदी में होगा और कुछ तेजी में, और एक वक़्त के बाद लिया गया रिस्क भी रिटर्न में बदल जाएगा। सोच समझ कर जो रिस्क आज हम लेंगे उसी से यह तय होगा कि भविष्य में हमारे बचाए गए पैसे की वैल्यू बढ़ेगी या घटेगी
SIP कैसे शुरू करें, कौन से फंड से शुरू करें, कितने समय के लिए करें, SIP शुरू करते वक़्त किन-किन बातों का ध्यान रखें, गोल बेस्ड (बच्चों की एजुकेशन, मैरिज, टैक्स सेविंग, ख़ुद की रिटायमेंट, ड्रीम कार या ड्रीम होम खरीदने के लिए) SIP कैसे शुरू करें। इन सब की जानकारी के लिये आप हमें कभी भी कॉल या व्हाट्सएप कर सकते है।

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