सोना, जमीन और इक्विटी।

जैसे सोना और जमीन एक भौतिक संपत्ति है। ठीक उसी प्रकार इक्विटी भी एक संपत्ति है। संपत्ति उसी को कहा जा सकता है। जिसका खुद का मूल्य हो। जिस प्रकार सोने और जमीन का खुद का मूल्य होता है। ठीक उसी प्रकार इक्विटी यानी ओनरशिप ऑफ बिजनेस आसान सी भाषा में कहें तो शेयर के रूप में किसी बिजनेस का मालिकाना हक जिसे स्टॉक या शेयर भी कहते हैं। उसका भी अपना खुद का मूल्य होता है। जिसकी वजह से यह भी एक वित्तिय संपत्ति मानी जाती है।

 दुनिया में जब भी किसी अमीर व्यक्ति की धन दौलत की बात की जाती है तो उसकी धन दौलत में केवल 3 प्रकार की ही संपत्तियां गिनी जाती हैं। पहली उसके पास कितनी कीमत का सोना है। दूसरा कितनी कीमत की जायदाद है। और तीसरा कितनी कंपनियों में उसका मालिकाना हक है। यानी कितनी वैल्यू कि उसके पास इक्विटी या शेयर है।

संपत्ति चाहे कोई भी हो, उस संपत्ति में किये गये निवेश की वैल्यू बाजार में उस संपत्ति के मूल्य के हिसाब से घटती बढ़ती रहती है। छोटे वक्त में किसी भी संपत्ति का मूल्य घटेगा या बढ़ेगा यह साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है। लेकिन लंबे वक्त में यह आपको बढ़ा हुआ ही मिलेगा। यह निश्चित तौर पर साफ-साफ कहा जा सकता है। अगर किसी ने अपना पैसा आज से 5 साल पहले इक्विटी, जमीन, या गोल्ड में लगया होगा, हो सकता है की 5 साल पहले किया गया निवेश आज नुकसान में हो , लेकिन जिस व्यक्ति ने आज से 15 या 20 साल पहले इन तीनों संपत्तियों में से जिस भी किसी में भी अपना पैसा लगाया था। उसके पैसे में आज के दिन सालाना तौर पर 10% से लेकर 15% तक की निश्चित तौर पर वृद्धि हुई है।
 यह कहा जाता है की अपनी बचत का वह हिस्सा जिसकी जरूरत 10, 15 या 20 साल बाद है। उसका निवेश संपत्ति में करना चाहिए। ताकि अपनी बचत पर महंगाई की दर से अधिक रिटर्न प्राप्त हो सके। अगर हमें अपने निवेश पर महंगाई की दर से ज्यादा रिटर्न प्राप्त होगा तो निश्चित तौर पर भविष्य में हमारे हाथ में ज्यादा पैसा आएगा और हमारी खरीददारी करने की क्षमता भी मजबूत बनेगी। परंतु  यदि हम अपनी सारी बचत को बैंक डिपोजिट या बीमा पॉलिसी में जमा करते हैं। तो भविष्य में हमारे हाथ में थोड़ा पैसा आएगा। जिसके कारण हमारी खरीदारी करने की क्षमता भी कमजोर हो जाएगी। इसीलिए तो कहा जाता है की बचत का वह हिस्सा जिसकी जरूरत 10,15 या 20 साल बाद पड़ेगी। उसका निवेश किसी संपत्ति में करना चाहिए। ना की बैंक डिपॉजिट या बीमा पॉलिसी में।

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